वण व्यापारी मारा सतगुरु आया भजन लिरिक्स

वण व्यापारी मारा सतगुरु आया भजन लिरिक्स
राजस्थानी भजन
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वण व्यापारी मारा सतगुरु आया,
वण व्यापारी मारा सतगुरु आया,
कोई कोई चीजो लाया रे हे हा,
लोंग सुपारी वीरा डोडा एलसी,
लोंग सुपारी वीरा डोडा एलसी,
भारी वस्तु लाया रे।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।



मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,

वनज को जारे लाभ चोगणा,
वनज को जारे लाभ चोगणा,
हाट बाजारों माय रे हा हा।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।



साचा जघेरी हीरा परखन लागा,

साचा जघेरी हीरा परखन लागा,
नुगरा ने ठोकर मारे रे।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।



तीन गुणा री भाई घड़ी वनाई रे,

तीन गुणा री भाई घड़ी वनाई रे,
अवगुण डोडा माय रे ह हा,
ओम सोभ दोई तोलण बेठा,
ओम सोभ दोई तोलण बेठा,
गणता ही भले नाइ रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।



रात दिन री चौसट घड़ी रे,

रात दिन री चौसट घड़ी रे,
पल भर बिछड़ नाही रे है हा,
गुरु शरणे माली लकमोजी बोले,
गुरु शरणे माली लकमोजी बोले,
खेलत जोनत वे नर भाई रे।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।



वण व्यापारी मारा सतगुरु आया,

वण व्यापारी मारा सतगुरु आया,
कोई कोई चीजो लाया रे हे हा,
लोंग सुपारी वीरा डोडा एलसी,
लोंग सुपारी वीरा डोडा एलसी,
भारी वस्तु लाया रे।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे।।

गायक – ओमप्रकाश प्रजापत।
भजन प्रेषक – डूंगाराम प्रजापत
9588915518



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